हरियाणा की मलीन बस्तियों में रहने वाले लोगों के पास अपने मकान, मोबाइल फ़ोन, गैस कनेक्शन और गाड़ियां हैं। ये जानकारी उन आंकड़ों से सामने आई हैं जो जनगणना विभाग ने मलिन बस्तियों को लेकर जारी किए हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ राज्य के करीब सत्तर लाख अट्ठासी हज़ार परिवारों में से क़रीब साव तीन लाख परिवार मलिन बस्ती में रह रहे हैं। अम्बाला छावनी, बेरी, कनीना, धारुहेड़ा और हसनपुर ऐसे शहर हैं जहां पर मलिन बस्तियां नहीं हैं। हरियाणा के जनगणना कार्यालय निदेशालय मलिन बस्तियों को लेकर ताज़ा आंकड़े जारी किये हैं. ये आंकड़े मई से जून 2010 के दौरान जमा किये थे. आंकड़ों के राज्य के 78.1 प्रतिशत स्लम परिवार स्थाई घरों में निवास करते है जबकि 17.7 प्रतिशत  परिवार  अर्ध-स्थाई और सिर्फ 4.2 प्रतिशत परिवार अस्थाई या जीर्ण शीर्ण ढ़ांचों में रहते हैं।  विभाग के उप निदेशक विनोद बब्बर के मुताबिक हरियाणा में ये आंकडें राज्य के 75 शहरों और कस्बों से इकट्ठा किये गए। उन्होंने बताया कि आंकड़ों के मुताबिक़ इन बस्तियों में 35.1 प्रतिशत परिवार एक कमरे के मकान में, 32.1 प्रतिशत परिवार दो कमरों के मकान में, 17.0 प्रतिशत परिवार तीन कमरों के मकान में और 15.8 प्रतिशत परिवार तीन से ज़्यादा कमरों वाले मकान में रहते हैं। उन्होंने बताया कि मलीन बस्तियों में 73.2 प्रतिशत घरों में टूटी के माध्यम से पेयजल की सुविधा उपलब्ध है। आकड़ों के मुताबिक़ इन बस्तियों में 99.23 प्रतिशत घरों में बिजली, 80 प्रतिशत घरों में शौचालय उपलब्ध हैं. 73.3 प्रतिशत शौचालयों में अलग से स्नान घर की सुविधा है। उन्होंने बताया कि 63.6 प्रतिशत परिवार खाना पकाने के लिए घरेलू गैस का उपयोग करते हैं तथा 74.3 प्रतिशत परिवारों में टेलीविजन, 67.3 प्रतिशत परिवारों के पास मोबाईल तथा 28.3 प्रतिशत परिवारों के पास कम्प्यूटर भी हैं. जनगणना मानदण्डों के मुताबिक़ उन क्षेत्रों को मलिन बस्ती क्षेत्र माना जाता है जहां पर घरों के जीर्ण शीर्ण ढांचे, अधिक भीड़-भाड़, तंग गलियां, बिजली, पेयजल एवं स्वच्छता सुविधाओं के अभाव हों.

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