लंबे इंतजार के बाद आखिरकार हरियाणा मंत्रिमंडल का विस्तार हो ही गया…. उम्मीद के मुताबिक हुड्डा कैबिनेट में मंगलवार को दो विधायक सावित्री जिंदल और आफताब अहमद को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, चंडीगढ़ राजभवन में राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने आफताब अहमद और सावित्री जिंदल को शपथ दिलाई।
आफताब अहमद मेवात जिले के नूहं विधानसभा सीट से एमएलए हैं। राजनीति उन्हें विरासत में मिली है। आफताब अहमद के पिता खुर्शीद अहमद का इलाके में खासा प्रभाव रहा है। खुर्शीद अहमद 1960 में पहली बार विधायक बने थे। अपने राजनीतिक सफर के दौरान खुर्शीद अहमद हरियाणा सरकार में मंत्री भी रहे और लोकसभा सांसद भी। मेवों का बड़ा वोटबैंक अहमद परिवार के साथ है। हालांकि आफताब अहमद का अब तक का राजनीति सफर उनके पिता खुर्शीद अहमद की तरह प्रभावी नहीं रहा है। आफताब अहमद ने साल 1996 में तावडू विधानसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2005 में उन्होंने नूहं से चुनाव लड़ा.. उस वक्त भी उन्हें हार का ही सामना करना पड़ा। लेकिन 2009 नौ के विधासभा चुनाव में आपताब अहमद को नूहं विधानसभा सीट से जीत मिली।
सावित्री जिंदल का राजनीतिक सफर ज्यादा लम्बा नहीं रहा है। हालांकि, उनके परिवार का राजनीति से पुराना नाता रहा है। 2005 में अपने पति और पूर्व ऊर्जा मंत्री ओपी जैन की मौत के बाद सावित्री जिंदल को राजनीति में आने का फैसला लेना पड़ा। ओपी जिंदल की एक हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद सावित्री जिंदल ने साल 2005 और 2009 में हिसार विधानसभा सीट से चुनाव लड़े। दोनों ही चुनावों में उन्हें जीत हासिल हुई। सावित्री जिंदल पिछली सरकार में स्थानीय निकाय, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभागों की मंत्री रहीं।

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